उस शनिवार भी बस में जबरदस्त भीड़ थी...लोग एक दूसरे पर चढ़े जा रहे थे....कोई एक पैर पर खड़ा था...तो कोई बस किसी तरह खड़े होने की हालत में था.....तभी एक आवाज़ आई ...बेटा जरा सरक जा...बुढ़ा हूं....पैर दुखने लगे हैं....जवाब में बेजान सी उत्तर सुनाई पड़ी...बड़ी मुश्किल से तो पिछले स्टॉप पर बैठने की जगह मिली है....एक की जगह में दो भला बैठ सकते हैं क्या.....तभी बस हिचकोले के सात रुकी ...कई और सवारी अंदर आ गए...कुछ उतरे भी होंगे...पर हालत में कोई फर्क नहीं पड़ा....इस स्टॉप से अंदर आई नई सवारियों में एक संभ्रान्त सी लड़की भी थी....काफी आधुनिक लग रही थी...परिधान से भी...मेकअप से भी....अरे ये क्या....जिस लड़के ने अभी अभी बूढ़े बाबा को बैठने की जगह नहीं दी थी...लड़की के फुसफुसाने पर खिसक गया....और लड़की बैठ गई....।
Mohalla Live
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Mohalla Live
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गाली-मुक्त सिनेमा में आ पाएगा पूरा समाज?
Posted: 24 Jan 2015 12:35 AM PST
सिनेमा समाज की कहानी कहता है और...
10 वर्ष पहले
11 टिप्पणियाँ:
ब्लॉग जगत में आपका एक बार फिर स्वागत है। आपने जिस वाकये को प्रस्तुत किया है, वाकई वो सामाजिक मूल्यों के पतन की ओर इशारा करता है।
आधुनिकता की दौड़ में अंधे हुए युवाओं में नैतिकता के पतन को साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ये घटना केवल इसी बात को साबित नहीं करती , ये भी दर्शाती है कि विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण आज के युवाओं की सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
आप इसी तरह अपने अनुभवों से अवगत कराते रहें ताकि युवा पीढ़ी आपके विचारों से कुछ तो सबक ले...
bahut badia
saadhuwaad!
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
We see such things in our daily life. It,s a pity on us.
bahut achhi post lagayi hai apne.
सामान्य सी हो चुकी घटना को संजीदगी से प्रस्तुत किया आपने. स्वागत है आपका ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.
खूबसूरत. जारी रहें. शुभकामनाएं.
मेरे ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं.
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल,शेर आदि के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पारिवारिक पत्रिका भी देखें
www.zindagilive.blogspot.com
अच्छा लिखा है आपने। बुजुर्गों का सम्मान तो करीब-करीब हर जगह खत्म सा होता जा रहा है।
चिठ्ठा जगत मैं आपका हार्दिक स्वागत है ..... समय निका कर मेरे ब्लॉग पर भी पधारे
प्रदीप मानोरिया
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